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पाठ 15

A) पाठ की प्रारंभ में दिए गए मुहावरे का अनुवाद करें

गुरुशुश्रूषया विद्या
पुष्कलेन धनेन वा
अथवा विद्यया विद्या
चतुर्थी नैव विद्यते
ज्ञान गुरु के आज्ञापालन से, या बहुत अधिक धन से, या ज्ञान के विनिमय से प्राप्त होता है। चौथा कोई मार्ग नहीं है।

B) निम्नलिखित तत्पुरुष समास को खोलें:

. बलकृतः बलेन कृतः — एक हिंसक

. बालधनस्य बालस्य धनस्य — एक अविवाहित की संपत्ति का

. नरकाकम् काक इव नरम् नर एव काकम् — एक कौवे जैसा व्यक्ति

. लोकगुरोः लोकस्य गुरोः लोकानां गुरोः — लोगों / संसार / संसारों के स्वामी / गुरु का

. जलेश्वरेण जलस्येश्वरेण जालानामीश्वरेण — जल के स्वामी द्वारा = वरुण द्वारा

. जनपानम् जनस्य पानम् जनानां पानम् — लोगों / मनुष्यों के लिए पेय

. वाक्यसारथीन् वाक्यस्य सारथीन् वाक्यानां सारथीन् — (अक.) वक्ता

. गुणवचनानि गुणस्य वचनानि गुणानां वचनानि — विशेषण

. मृगेश्वरैः मृगस्येश्वरैः मृगाणामीश्वरैः — वन्य पशुओं के स्वामियों द्वारा = शेरों द्वारा

१०. बुद्धिकृतायाः बुद्ध्या कृतायाः — (ज.), जिसका तर्कबद्ध रूप से प्रबंधन किया गया है, तर्कबद्ध रूप से व्यवहार करने वाली

११. धर्मयज्ञेन धर्मेनैव यज्ञेन धर्मस्य यज्ञ्नेन — एक अरक्त बलि द्वारा

१२. यज्ञाङ्गानि यज्ञस्याङ्गानि यज्ञाanamङ्गानि — बलि के अंग / घटक / भाग, बलि के उपकरण

१३. गृहजनेन गृहस्य जनेन — कुल द्वारा

१४. ग्रामलेखकाः ग्रामाणां लेखकाः — गाँव के लेखक

१५. नागदेवः नागानां देवः — नागदेवता, नागराज, हाथीदेवता, हाथीराज

१६. पुण्यजिताभिः पुण्येन जिताभिः — पुण्य / कल्याण द्वारा विजय प्राप्त (स्त्री.)

१७. पापलोकम् पापस्य लोकम् पापानां लोकम् पापं लोकम् — (अक.) दुष्टों की दुनिया, दुष्टों की संसार, नरक, दुष्ट संसार

१८. सत्यवदनस्य सत्यस्य वदनस्य — सत्य बोलने का

१९. दानधर्मेण दानस्य धर्मेण दानेनैव धर्मेण — दान करने की कर्तव्यता द्वारा

२०. सुखप्रश्नः सुखस्य प्रश्नः सुखः प्रश्नः — सुख के प्रश्न, कल्याण के प्रश्न, स्वास्थ्य के प्रश्न, एक हल्का प्रश्न

२१. दुःखमोहस्य दुःखस्य मोहस्य दुःखेन मोहस्य — कष्ट द्वारा भ्रम, निराशा, कष्ट के संबंध में अज्ञानता

२२. सोमपात्राणि सोमस्य पात्राणि — पात्र

२३. स्वर्गमार्गः स्वर्गस्य मार्गः — स्वर्ग का मार्ग

२४. कामधेन्वा कामस्य धेन्वा कामानां धेन्वा — कामधेनु द्वारा

२५. वर्णधर्मः वर्णानां धर्मः — जाति-विधि

२६. श्रुत्युदितम् श्रुत्योदितम् श्रुतेरुदितम् — वेद द्वारा कहे गए / निर्धारित


अभ.: जलेश्वरो वरुणः
(छवि स्रोत: विवरण)


अतिरिक्त अभ्यास

निम्नलिखित समासों को तत्पुरुष के रूप में संस्कृत में विघटित करें और जर्मन अनुवाद प्रदान करें। सभी संभव विघटन और अनुवाद प्रदान करें। यह भी बताएं कि समग्र समास किस विभक्ति और वचन में है।

. देवेन्द्रस्य देवानामिन्द्रस्य — देवताओं के प्रमुख

. दुःखदग्धा दुःखेन दग्धा — कष्ट से जली हुई स्त्री

. मोक्षधर्मः मोक्षस्य धर्मः — मोक्ष की शिक्षा, मोक्ष का विधि

. अन्नजातानि अन्नेन जातानि अन्नस्य जातानि — भोजन से उत्पन्न, भोजन की प्रकृतियाँ

. गृहकरणम् गृहस्य करणम् — गृहकार्य

. शूद्रकृतेन शूद्रस्य कृतेन शूद्राणां कृतेन — शूद्रकर्म द्वारा

. ईश्वरपूजा ईश्वरस्य पूजा — देवार्चन

. देवेश्वरः देवानामीश्वरः — देवताओं के स्वामी

. क्षत्रिययज्ञम् क्षत्रियस्य यज्ञम् क्षत्रियाणां यज्ञम् — क्षत्रियों का यज्ञ (सम्प्रदान/अपवाद) / क्षत्रिय का यज्ञ, क्षत्रियों के लिए यज्ञ / एक क्षत्रिय के लिए यज्ञ

१०. वैश्यभावेन वैश्यस्य भावेन वैश्यानां भावेन — वैश्यकर्म द्वारा

११. देवगुरोः देवानां गुरोः देवस्येव् गुरोः देवस्यैव गोरोः — देवताओं के शिक्षक, देवताओं के समान शिक्षक, दिव्य शिक्षक

१२. धनलोभः धनस्य लोभः धनानां लोभः — आर्थिक लाभ

१३. गृहदासी गृहस्य दासी — गृहदासी

१४. दुःखमोहः दुःखस्य मोहः — कष्ट पर मोह, कष्ट से भ्रम

१५. ग्रामेश्वरम् ग्रामस्येश्वरम् ग्रामाणामीश्वरम् — गाँव के स्वामी

१६. नगरजनाः नगरस्य जनाः नगराणां जनाः — नगर के लोग, नगरवासी

१७. यज्ञकालस्य यज्ञस्य कालस्य जज्ञानां कालस्य — यज्ञ के लिए उचित समय / यज्ञों के लिए, समय ...

१८. देवगृहाणि देवस्य गृहाणि देवाणां गृहाणि — देवतालय

१९. देवपुत्राणाम् देवानां पुत्राणाम् — देवताओं के पुत्र

२०. पश्विष्टिः पशोरिष्टिः पशूनामीष्टिः — पशुयज्ञ

२१. स्मृत्युक्तम् स्मृत्योक्तम् स्मृतेरुक्तम् स्मृत्या उक्तम् — पवित्र परंपरा का मंत्र

२२. गुरुगृहम् गुरोर्गृहम् गुरूणां गृहम् — गुरु का घर / गुरुओं का घर

२३. सोमयज्ञेन सोमस्य यज्ञेन — सोमयज्ञ द्वारा

२४. स्वर्गगताः स्वर्गं गताः — स्वर्ग में गये हुए

२५. सुखप्रश्नम् सुखस्य प्रश्नम् — सुख के बारे में (सम्प्रदान/अपवाद) प्रश्न, कल्याण के बारे में प्रश्न, स्थिति के बारे में प्रश्न, सरल प्रश्न

२६. पशुधर्मः पशोर्धर्मः पशूनां धर्मः — पशुओं का विधि, पशुव्यवहार

२७. स्वर्गलोकः स्वर्gaणां लोकः स्वर्ग एव लोकः — स्वर्गलोक, देवताओं का लोक

२८. ऋषियज्ञैः ऋषेर्यज्ञैः ऋषीणां यज्ञैः — वेद ऋषियों के यज्ञ द्वारा / वेद ऋषि के यज्ञ द्वारा

२९. तत्कालम् तस्य कालम् त्स्याः कालम् तेषां कालम् तासां कालम् — इसके लिए समय (सम्प्रदान/अपवाद), इसके लिए (उचित) समय

३०. सत्यवदनम् स्त्यस्य वदनम् — सत्यवाणी, सत्य बोलना


अभ.: गृहकरणम्
(चित्र स्रोत: विवरण)

Tüpfli's Global Village Library का हिस्सा