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व्याकरण विषय

यह पृष्ठ संस्कृत पाठ्यक्रम के सभी व्याकरणिक विषयों का एक व्यवस्थित अवलोकन प्रदान करता है। यहाँ 61 पाठों में से प्रत्येक को विषयगत रूप से वर्गीकृत किया गया है।

1. ध्वनिविज्ञान एवं लिपि (संहिता एवं लिपि)

2. शब्दविद्या (रूपविज्ञान)

2.1 संज्ञाएँ और विशेषण (विभक्ति)

  • मूलभूत: विसर्ग सिद्धांत → पाठ 1, पाठ 2
  • अ-प्रत्यय (पुल्लिंग और नपुंसकलिङ्ग) → पाठ 2, पाठ 7
  • इ- और उ-प्रत्ययपाठ 3, पाठ 27, पाठ 52
  • व्यंजनप्रत्यय:
    • -mant / -vant पर समाप्त होने वाले प्रत्यय → पाठ 13
    • -n पर समाप्त होने वाले प्रत्यय (राजन्, आत्मन्) → पाठ 38
    • सरल व्यंजनप्रत्यय → पाठ 51, पाठ 54
    • -ā, -ī, -ū पर समाप्त होने वाले मूलनाम → पाठ 61
  • द्विवचन (द्विवचन) संज्ञाओं का → पाठ 49, पाठ 50, पाठ 53
  • संख्याएँ & तुलना:
    • संख्यावाचक शब्द (कार्डिनल/ऑर्डिनल) → पाठ 52
    • तुलना (संपरिक्कत/सुपरलेटिव) → पाठ 53

2.2 सर्वनामाणि व अव्ययानि

  • सर्वनाम:
    • प्रश्नवाचक व प्रदर्शक सर्वनाम → पाठ 4
    • संबंधवाचक सर्वनाम (यद्) → पाठ 19
    • व्यक्तिवाचक सर्वनाम (प्रथम व द्वितीय पुरुष) → पाठ 46, पाठ 47
    • अनिश्चित सर्वनाम → पाठ 37
  • क्रियाविशेषण व सम्बोधन:

2.3 क्रियाएँ (सर्वनाम)

2.4 संस्कृत-निर्मित शब्द एवं समास

  • समास (संयुक्त शब्द):
  • प्रत्यय एवं क्रियाविशेषक:
    • महत्वपूर्ण प्रत्यय (-a, -ana, -tra, आदि) -> पाठ 8, पाठ 9
    • PPP (कर्मणि कृदंत / पूर्ण काल का कर्मवाच्य क्रियाविशेषक) -> पाठ 12, पाठ 13
    • PPA (कर्तरि कृदंत / पूर्ण काल का कर्तृवाच्य क्रियाविशेषक) -> पाठ 52
    • अतिरिक्त क्रियाविशेषक एवं अनिर्देश्य क्रियापद -> पाठ 22, पाठ 23

3. वाक्यविद्या (व्याकरण)

4. छंदशास्त्र (व्याकरण)

संस्कृत-दर्शन और साहित्य अक्सर श्लोकों में लिखे जाते हैं। छंद शास्त्र इन श्लोकों की लय और संरचना सिखाता है।

Tüpfli's Global Village Library का हिस्सा