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पाठ २७

२७.१. लोकार का प्रयोग (⟪सप्तमी⟫ f. = "सातवाँ विभक्ति प्रत्यय")

लोकार (⟪सप्तमी⟫) निम्नलिखित प्रश्नों पर खड़ा होता है:

  • कहाँ?
  • कब?
  • किन परिस्थितियों में?
  • किस संदर्भ में?

१. लोकार (⟪सप्तमी⟫) "कहाँ?" प्रश्न पर उस स्थान को दर्शाता है, जिसमें (पर, संपर्क में) कर्मकारक (⟪कर्ता⟫) या किसी क्रिया का वस्तु होता है, या जहाँ स्वयं क्रिया संपन्न होती है।

⟪नगरे वसति⟫ = "वह नगर में रहता है"


चित्र: ⟪जयपुरनगरे
जयपुर, १८७५।
(चित्र स्रोत: विवरण)

२. लोकार "कब?" प्रश्न पर समय या बाहरी परिस्थितियों को दर्शाता है:

⟪तस्मिन्काले⟫ = "उस समय, उस काल में"

यहाँ 'लोकेटिवस एब्सोलुटस' (Locativus Absolutus) भी आता है:

यदि किसी व्यक्ति या वस्तु की क्रिया या अवस्था उस समय को निर्धारित करती है, जिसमें - या उन परिस्थितियों के तहत जिनके अंतर्गत - कोई दूसरा व्यक्ति या वस्तु किसी क्रिया को संपन्न करती है या किसी निश्चित अवस्था में होती है, तो उस पहले व्यक्ति या वस्तु को दर्शाने वाला शब्द उसके साथ उसे अधिक स्पष्ट करने वाले शब्द (जो अक्सर एक विभक्ति रूप होता है) के साथ लोकार (⟪सप्तमी⟫) में आता है:

⟪एवं गच्छति काले⟫ = "जब समय इस प्रकार बीत रहा था..."
>
⟪तस्मिन्गते⟫ = "जब वह चला गया था..."

कभी-कभी कर्मकारक (⟪कर्ता⟫) को विशेष रूप से नहीं दर्शाया जाता:

⟪एवं सति⟫ = "चूंकि स्थिति ऐसी है"

लोकेटिवस एब्सोलुटस को संदर्भ के अनुसार "जबकि" (उदाहरणार्थ, वर्तमान काल का विभक्ति रूप), "के बाद", "जब" (उदाहरणार्थ, पूर्ण काल का विभक्ति रूप), "क्योंकि", "चूंकि", "हालांकि", "यदि" आदि के रूप में अनुवाद किया जाना चाहिए।

ध्यान रखें: निरपेक्ष कारक (Absolutivum) में, निरपेक्ष कारक का कर्ता और मुख्य वाक्य का कर्ता समान होने चाहिए, जबकि निरपेक्ष स्थल कारक (Locativus absolutus) में, निरपेक्ष स्थल कारक का कर्ता और मुख्य क्रिया का कर्ता भिन्न होने चाहिए।


आकृति: ⟪एवं गच्छति कालयुष्ट्रः स्वपित⟫i
राजस्थान।
(चित्र स्रोत: विवरण)

3. स्थल कारक (Lokativ) प्रश्न "किस संबंध में?" आदि पर भी प्रयुक्त होता है:

⟪अस्ति तस्य पुत्रे स्नेहः⟫ = "उसके पुत्र के प्रति प्रेम है" (शब्दार्थ: "पुत्र के संबंध में उसके पास प्रेम है")


आकृति: ⟪अस्ति तस्य पुत्रे स्नेहः
होली।
(चित्र स्रोत: विवरण)

4. स्थल कारक (Lokativ) देशी शब्दकोशों और टिप्पणीकारों के पास किसी शब्द के अर्थ को दर्शाने के लिए प्रयुक्त होता है:

⟪भू सत्तायाम्⟫ = "मूल धातु ⟪भू⟫ का अर्थ 'सत्ता' (sat-tā) में"

स्थल कारक के प्रयोग के बारे में आगे।

27.2. स्थल कारक (⟪सप्तमी⟫) का निर्माण

स्थल कारक (⟪सप्तमी⟫) के नियमित प्रत्यय हैं:

  • एकवचन: -i
  • बहुवचन: -su

-su से पूर्व ध्वनि परिवर्तनों और -su के संभवतः -ṣu में मूर्धन्यीकरण (Cerebralisation) का ध्यान रखें!

27.2.1. व्यंजन-आधारित वचन (Konsonantische Stämme)

आधार (Stamm)स्थल कारक एकवचन
⟪सप्तमी एकवचन
स्थल कारक बहुवचन
⟪सप्तमी बहुवचन
⟪यजन्त्⟪यजति⟫ (yaj-at-i)⟪यजत्सु
⟪महान्त्⟪महति⟪महत्सु
⟪पशुमन्त्⟪पशुमति⟪पशुमत्सु
⟪गुणवन्त्⟪गुणवति⟪गुणवत्सु

27.2.2. प्रश्नवाचक, निर्देशक और संबंधसूचक सर्वनाम

⟪किम्⟪यद्⟪तद्⟪एतद्⟪इदम्
पुल्लिंग / नपुंसकलिङ्ग
लोकटिव एकवचन
⟪कस्मिन्⟪यस्मिन्⟪तस्मिन्⟪एतस्मिन्⟪अस्मिन्
पुल्लिंग / नपुंसकलिङ्ग
लोकटिव बहुवचन
⟪केषु⟪येषु⟪तेषु⟪एतेषु⟪एषु
स्त्रीलिङ्ग
लोकटिव एकवचन
⟪कस्याम्⟪यस्याम्⟪तस्याम्⟪एतस्याम्⟪अस्याम्
स्त्रीलिङ्ग
लोकटिव बहुवचन
⟪कासु⟪यासु⟪तासु⟪एतासु⟪आसु

27.2.3. स्वरान्त पद

लोकटिव एकवचनलोकटिव बहुवचन
⟪देव⟫ पुल्लिंग.⟪देवे
(« देव + -ि)
⟪देवेषु
⟪कवि⟫ पुल्लिंग.⟪कवौ⟪कविषु
⟪पशु⟫ पुल्लिंग.⟪पशौ⟪पशुषु
⟪देवता⟫ स्त्रीलिङ्ग.⟪देवतायाम्⟪देवतासु
⟪देवी⟫ स्त्रीलिङ्ग.⟪देव्याम्⟪देवीषु
⟪श्रुति⟫ स्त्रीलिङ्ग.⟪श्रुतौ⟫ अथवा ⟪श्रुत्याम्
(अर्थात् या तो कवि की भाँति
⟪कवि⟫ अथवा देवी की भाँति
⟪देवी⟫)
⟪श्रुतिषु
⟪धेनु⟫ स्त्रीलिङ्ग.⟪धेनौ⟫ अथवा ⟪धेन्वाम्⟪धेनुषु

27.3. नियमित विभक्तिप्रत्ययों का सारांश (⟪विभक्ति⟫)

एकवचन
⟪एकवचनम्
बहुवचन
⟪बहुवचनम्
पुल्लिंग / स्त्रीलिङ्ग
⟪पुंस्⟫ / ⟪स्त्री
नपुंसकलिङ्ग
⟪नपुंसकम्
पुल्लिंग / स्त्रीलिङ्ग
⟪पुंस्⟫ / ⟪स्त्री
नपुंसकलिङ्ग
⟪नपुंसकम्
1. सम्प्रदान
⟪१⟫. ⟪प्रथमा
-s-as-i
2. accusative
⟪२⟫. ⟪द्वितीया
-am-as-i
3. करण
⟪३⟫. ⟪तृतीया
4. सम्प्रदान
⟪४⟫. ⟪चतुर्थी
-e
5. अपादान
⟪५⟫. ⟪पञ्चमी
-as
6. सम्प्रदान
⟪६⟫. ⟪षष्ठी
-as
7. लोकटिव्
⟪७⟫. ⟪सप्तमी
-i

सिग्नल रंग से मुद्रित: प्रबल विभक्ति (मूल स्वरवर्णन के साथ)।

27.4. ⟪राम⟫ से संबंधित सभी विभक्ति रूपों (एकवचन) वाला एक श्लोक


आकृति: ⟪रामे चित्तलयः सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर ॥
Rāma-Satz.
(चित्र स्रोत: विवरण)

sig[⟪रामो⟫] ⟪राजमणिः सदा विजयते⟪रामं ⟪रमेशं भजे⟫:br ⟪रामेणा⟪भिहता निशाचरचमू⟪रामाय ⟪तस्मै नमः ।⟫:br ⟪रामान्ना⟪स्ति परायणम् परतरं⟪रामस्य ⟪दासोऽस्म्यहम्⟫:br ⟪रामे ⟪चित्तलयः सदा भवतु मे भो⟪राम ⟪मामुद्धर ॥

अनुवाद:

  1. सम्बोधन (Nominativ): राजाओं में से रत्न (⟪मणि⟫ पुं.) राम सदैव विजयी होते हैं (⟪सदा⟫)।
  2. सम्प्रदान (Akkusativ): मैं रामा (= लक्ष्मी) के स्वामी और पति (⟪ईश⟫ पुं.) राम को प्रेम करता हूँ (⟪भज्⟫ 1U)।
  3. करण (Instrumentalis): राम ने रात्रि-चरों (= दानवों) के सेना (⟪चमू⟫ स्त्री.) को मार डाला (⟪निशा⟫ स्त्री. = रात्रि)।
  4. सम्प्रदान (Dativ): इस राम को नमस्कार हो!
  5. अपदान (Ablativ): राम से बेहतर शरण (⟪परायण⟫ नपुं.) कोई नहीं है (⟪परतर⟫ 3)।
  6. सम्प्रदान (Genetiv): मैं (⟪अहम्⟫) राम का दास (⟪अस्मि⟫) हूँ।
  7. अधिकरण (Lokativ): मेरे हृदय की शांति (⟪लय⟫ पुं.) सदैव राम में हो (⟪भवतु⟫)।
  8. सम्बोधन (Vokativ): हे राम, मुझे बचाओ (⟪उद्धर⟫ = ⟪उद्⟫ + ⟪हृ⟫ या ⟪उद्⟫ + ⟪धृ⟫ का आज्ञाकारक) (⟪माम्⟫)!

27.5. शब्द सूची

⟪वस्⟫ 1P (⟪वसति⟫): निवास करना, रहना (जिसके साथ रहते हैं उस व्यक्ति के अधिकरण के साथ)

भविष्यकाल: ⟪वत्स्यति⟫:br क्रियापद (Passive): ⟪उष्यते⟫:br PPP: ⟪उषित⟫:br अनियत क्रियापद (Infinitive): ⟪वस्तुम्

इससे:

⟪वस्तु⟫ नपुं.: आसन, स्थान; वास्तविक वस्तु, यथार्थ वस्तु, सत्यता, विषय

⟪वस्तुतस्⟫: वास्तव में, सचमुच

⟪वस्⟫ २आ (⟪वस्ते⟫): पहनना (वस्त्र), धारण करना (वस्त्र)

भविष्यत्काल: ⟪वसिष्यते⟫:br PPP: ⟪वसित⟫:br अनित्यपद: ⟪वसितुम्

इससे:

⟪वस्त्र⟫ नपुं.लि.: पहनने का साधन = वस्त्र, परिधान, कपड़ा


चित्र: ⟪वस्त्राणि
Vastrāṇi. Majuli, Assam.
(चित्र स्रोत: विवरण)

⟪वस्⟫ ६प (⟪उच्छति⟫): चमकना (यह धातु नामनिर्माण के लिए महत्वपूर्ण है:)

⟪वसु⟫ नपुं.लि.: धन, खज़ाना, संपत्ति, मालिकाना हक

⟪वसन्त⟫ पुं.लि.: ("चमकने वाला" =) वसंत (मार्च से मई तक)


चित्र: ⟪वसन्तः
वसन्त (Schleichera oleosa), खोपोली, महाराष्ट्र, 2007-04-07.
(चित्र स्रोत: विवरण)

⟪हृ⟫ १उ (⟪हरति⟫): धारण करना, ले जाना; लाना, छीनना, हरण करना

भविष्यत्काल: ⟪हरिष्यति⟫:br कर्तरि कर्मणि: ⟪ह्रियते⟫:br PPP: ⟪हृत⟫:br अनित्यपद: ⟪हर्तुम्

इससे:

⟪हर⟫ ३: छीनते हुए; पुं.लि.: विनाशक = शिव का एक उपनाम

⟪हर⟫ का प्रतिरूप:

⟪हरि⟫ ३: पीला, हल्का पीला, हरा; पुं.लि. विष्णु का उपनाम (यह ⟪हृ⟫ १ धातु से संबंधित नहीं है)

⟪हरिहर⟫ पुं.लि.: विष्णु और शिव का एक ही देवता के रूप में एकीकरण।


चित्र: ⟪हरिहरः
हरिहर (बाएँ: विष्णु, दाएँ: शिव)।
(चित्र स्रोत: विवरण)


चित्र: ⟪हरिहरः
हरिहर (बाएँ: विष्णु, दाएँ: शिव)। गोद्रूमद्वीप, पश्चिम बंगाल।
(चित्र स्रोत: विवरण)

२७.६. अभ्यास

अ) निम्नलिखित वाक्य में कोष्ठक में दिए गए शब्दों का प्रयोग बहुवचन (⟪सप्तमी⟫) एकवचन और - जहाँ उचित हो - बहुवचन में करें। विभिन्न संधियों का ध्यान रखें, अर्थात प्रत्येक बार पूरा वाक्य लिखें!

⟪रामस्⟫ ... ⟪वसति ।⟫ (⟪ग्राम । गुरु । सत्यवान्कविः । पुत्रं लब्धुकामा ब्राह्मणी । गृह । तन्नगरम् । मुह्यञ्छत्रुः⟫)

B) अनुवाद करें और समासों को खोलें:

⟪धर्मं वदति गुरौ दुर्जना न शृण्वन्ति ॥१॥ बुद्धकाले नरैरार्यसत्यानि श्रोतुं शक्यन्ते ॥२॥ वसितसुवस्त्रां नरा लुभ्यन्ति । एवं सति सत्यो नरेभ्यः सुवस्त्राणीच्छन्ति ॥३॥


आकृति: ⟪वसितसुवस्त्रां नरा लुभ्यन्ति । एवं सति सत्यो नरेभ्यः सुवस्त्राणीच्छन्ति ॥
राजा रवि वर्मा (1848 - 1906) द्वारा चित्र।
(चित्र स्रोत: विवरण)

⟪पुत्रे मृतेऽपुत्रा ब्राह्मणी पुत्रं लब्धुं व्रतं करोति ॥४॥ उपनीतबालैर्गुरुकुले उष्यते ॥५॥ यज्ञकाले विगतेऽनिष्टदेवा विस्मृतयज्ञब्राह्मणेभ्यः क्रुध्यन्ति ॥६॥ गुरौ तिष्ठति बाल आसितुं नार्हति ॥७॥ एवं काले गच्छति स्वाचारक्षत्रिय इष्टं धनं न लभते ॥८॥ ब्राह्मण्यां महाकवावागच्छन्त्यां ब्राह्मणीपुत्रोऽप्यागच्छति ॥९॥ गुरुषूपदिशत्सु सुनीतबाला वक्तुं नार्हन्ति ॥१०॥

27.7. याद करने के लिए विभक्ति प्रत्यय

27.7.1. -a पर समाप्त होने वाले पुल्लिंग: ⟪नर

एकवचन
⟪एकवचनम्
बहुवचन
⟪बहुवचनम्
1. सम्प्रदान
⟪१⟫. ⟪प्रथमा
⟪नरस्⟪नरास्
2. accusative
⟪२⟫. ⟪द्वितीया
⟪नरम्⟪नरान्
3. करण
⟪३⟫. ⟪तृतीया
⟪नरेण⟪नरैस्
4. संप्रदान
⟪४⟫. ⟪चतुर्थी
⟪नराय⟪नरेभ्यस्
5. अपादान
⟪५⟫. ⟪पञ्चमी
⟪नरात्⟪नरेभ्यस्
6. सम्प्रदान
⟪६⟫. ⟪षष्ठी
⟪नरस्य⟪नराणाम्
7. स्थान
⟪७⟫. ⟪सप्तमी
⟪नरे⟪नरेषु


चित्र: ⟪नराः
नरन। उदयपुर।
(चित्र स्रोत: विवरण)

२७.७.२. नपुंसकलिङ्ग -अन्त: ⟪फल

एकवचन
⟪एकवचनम्
बहुवचन
⟪बहुवचनम्
१. सम्प्रदान
⟪१⟫. ⟪प्रथमा
⟪फलम्⟪फलानि
२. accusative
⟪२⟫. ⟪द्वितीया
⟪फलम्⟪फलानि
३. instrumental
⟪३⟫. ⟪तृतीया
⟪फलेन⟪फलैस्
४. dative
⟪४⟫. ⟪चतुर्थी
⟪फलाय⟪फलेभ्यस्
५. ablative
⟪५⟫. ⟪पञ्चमी
⟪फलात्⟪फलेभ्यस्
६. genitive
⟪६⟫. ⟪षष्ठी
⟪फलस्य⟪फलाणाम्
७. locative
⟪७⟫. ⟪सप्तमी
⟪फले⟪फलेषु


चित्र: ⟪फलानि
फल। बेंगळूरु।
(चित्र स्रोत: विवरण)

२७.७.३. स्त्रीलिङ्ग -आन्त: ⟪क्षत्रिया

एकवचन
⟪एकवचनम्
बहुवचन
⟪बहुवचनम्
१. सम्प्रदान
⟪१⟫. ⟪प्रथमा
⟪क्षत्रिया⟪क्षत्रियास्
२. accusative
⟪२⟫. ⟪द्वितीया
⟪क्षत्रियाम्⟪क्षत्रियास्
३. instrumental
⟪३⟫. ⟪तृतीया
⟪क्षत्रियया⟪क्षत्रियाभिस्
४. dative
⟪४⟫. ⟪चतुर्थी
⟪क्षत्रियायै⟪क्षत्रियाभ्यस्
५. ablative
⟪५⟫. ⟪पञ्चमी
⟪क्षत्रियायास्⟪क्षत्रियाभ्यस्
६. genitive
⟪६⟫. ⟪षष्ठी
⟪क्षत्रियायास्⟪क्षत्रियाणाम्
७. locative
⟪७⟫. ⟪सप्तमी
⟪क्षत्रियायाम्⟪क्षत्रियासु


चित्र: ⟪क्षत्रिया
महारानी वणि विलास सन्नधिना (१८६६ - १९३४) अपने पोते राजकुमार जय चामराज वाडियार सहित, मिसूरु।
(चित्र स्रोत: विवरण)

27.7.4. पुल्लिंग शब्द जो -i पर समाप्त होते हैं: ⟪अरि

एकवचन
⟪एकवचनम्
बहुवचन
⟪बहुवचनम्
1. सम्प्रदान
⟪१⟫. ⟪प्रथमा
⟪अरिस्⟪अरयस्
2. accusative
⟪२⟫. ⟪द्वितीया
⟪अरिम्⟪अरीन्
3. instrumental
⟪३⟫. ⟪तृतीया
⟪अरिणा⟪अरिभिस्
4. dative
⟪४⟫. ⟪चतुर्थी
⟪अरये⟪अरिभ्यस्
5. ablative
⟪५⟫. ⟪पञ्चमी
⟪अरेस्⟪अरिभ्यस्
6. genitive
⟪६⟫. ⟪षष्ठी
⟪अरेस्⟪अरीणाम्
7. locative
⟪७⟫. ⟪सप्तमी
⟪अरौ⟪अरिषु


चित्र: ⟪अरयः
1857 के विद्रोह में शामिल दो सदस्यों की फांसी। फेलिसे बीटो (1833/1834 - लगभग 1907) की फोटोग्राफी।
(चित्र स्रोत: विवरण)

27.7.5. स्त्रीलिंग शब्द जो -i पर समाप्त होते हैं: ⟪मति

एकवचन
⟪एकवचनम्
बहुवचन
⟪बहुवचनम्
1. सम्प्रदान
⟪१⟫. ⟪प्रथमा
⟪मतिस्⟪मतयस्
2. accusative
⟪२⟫. ⟪द्वितीया
⟪मतिम्⟪मतीस्
3. instrumental
⟪३⟫. ⟪तृतीया
⟪मत्या⟪मतिभिस्
4. dative
⟪४⟫. ⟪चतुर्थी
⟪मतेस्⟫ / ⟪मत्यै⟪मतिभ्यस्
5. ablative
⟪५⟫. ⟪पञ्चमी
⟪मतेस्⟫ / ⟪मत्यास्⟪मतिभ्यस्
6. genitive
⟪६⟫. ⟪षष्ठी
⟪मतेस्⟫ / ⟪मत्यास्⟪मतीणाम्
7. locative
⟪७⟫. ⟪सप्तमी
⟪मतौ⟫ / ⟪मत्याम्⟪मतिषु

27.7.6. पुल्लिंग शब्द जो -u पर समाप्त होते हैं: ⟪गुरु

एकवचन
⟪एकवचनम्
बहुवचन
⟪बहुवचनम्
1. सम्प्रदान
⟪१⟫. ⟪प्रथमा
⟪गुरुस्⟪गुरवस्
2. accusative
⟪२⟫. ⟪द्वितीया
⟪गुरुम्⟪गुरून्
3. instrumental
⟪३⟫. ⟪तृतीया
⟪गुरुणा⟪गुरुभिस्
4. dative
⟪४⟫. ⟪चतुर्थी
⟪गुरवे⟪गुरुभ्यस्
5. ablative
⟪५⟫. ⟪पञ्चमी
⟪गुरोस्⟪गुरुभ्यस्
6. genitive
⟪६⟫. ⟪षष्ठी
⟪गुरोस्⟪गुरूणाम्
7. locative
⟪७⟫. ⟪सप्तमी
⟪गुरौ⟪गुरुषु


चित्र: ⟪गुरुः
महर्षि महेश योगी (1917 - 2008) गुरु।
(चित्र स्रोत: विवरण)

27.7.7. -u पर समाप्त होने वाली स्त्रीलिंग शब्द: ⟪धेनु

एकवचन
⟪एकवचनम्
बहुवचन
⟪बहुवचनम्
1. सम्प्रदान
⟪१⟫. ⟪प्रथमा
⟪धेनुस्⟪धेनवस्
2. accusative
⟪२⟫. ⟪द्वितीया
⟪धेनुम्⟪धेनूस्
3. करण
⟪३⟫. ⟪तृतीया
⟪धेन्वा⟪धेनुभिस्
4. संप्रदान
⟪४⟫. ⟪चतुर्थी
⟪धेनवे⟫ / ⟪धेन्वै⟪धेनुभ्यस्
5. अपादान
⟪५⟫. ⟪पञ्चमी
⟪धेनोस्⟫ / ⟪धेन्वास्⟪धेनुभ्यस्
6. सम्प्रदान
⟪६⟫. ⟪षष्ठी
⟪धेनोस्⟫ / ⟪धेन्वास्⟪धेनूणाम्
7. संप्रदान
⟪७⟫. ⟪सप्तमी
⟪धेनौ⟫ / ⟪धेन्वाम्⟪धेनुषु


चित्र: ⟪धेनुः
उदयपुर में गाय।
(चित्र स्रोत: विवरण)

27.7.8. बहुवर्णीय स्त्रीलिंग शब्द -ī पर समाप्त: ⟪देवी

एकवचन
⟪एकवचनम्
बहुवचन
⟪बहुवचनम्
1. सम्प्रदान
⟪१⟫. ⟪प्रथमा
⟪देवी⟪देव्यस्
2. accusative
⟪२⟫. ⟪द्वितीया
⟪देवीम्⟪देवीस्
3. करण
⟪३⟫. ⟪तृतीया
⟪देव्या⟪देवीभिस्
4. संप्रदान
⟪४⟫. ⟪चतुर्थी
⟪देव्यै⟪देवीभ्यस्
5. अपादान
⟪५⟫. ⟪पञ्चमी
⟪देव्यास्⟪देवीभ्यस्
6. सम्प्रदान
⟪६⟫. ⟪षष्ठी
⟪देव्यास्⟪देवीणाम्
7. संप्रदान
⟪७⟫. ⟪सप्तमी
⟪देव्याम्⟪देवीषु


चित्र: ⟪त्रिदेवी
त्रिदेवी (लक्ष्मी, पार्वती, सरस्वती)।
(चित्र स्रोत: विवरण)

२७.७.९. वर्तमान काल का कर्तरि कृदंत परस्मैपद में -ant प्रत्यय के साथ: ⟪सन्त्

एकवचन
पुल्लिंग
⟪पुंस्
एकवचन
नपुंसकलिंग
⟪नपुंसकम्
बहुवचन
पुल्लिंग
⟪पुंस्
बहुवचन
नपुंसकलिंग
⟪नपुंसकम्
१. सम्प्रदान
⟪१⟫. ⟪प्रथमा
⟪सन्⟪सत्⟪सन्तः⟪सन्ति
२. accusative
⟪२⟫. ⟪द्वितीया
⟪सन्तम्⟪सत्⟪सतस्⟪सन्ति
३. करण
⟪३⟫. ⟪तृतीया
⟪सता
४. संप्रदान
⟪४⟫. ⟪चतुर्थी
⟪सते
५. अपादान
⟪५⟫. ⟪पञ्चमी
⟪सतस्
६. सम्प्रदान
⟪६⟫. ⟪षष्ठी
⟪सतस्
७. संप्रदान
⟪७⟫. ⟪सप्तमी
⟪सति


चित्र: ⟪सद्गुरुः
शिरडी के साईं बाबा (१८३५ - १९१८)।
(चित्र स्रोत: विवरण)

२७.७.१०. ⟪महान्त्

एकवचन
पुल्लिंग
⟪पुंस्
एकवचन
नपुंसकलिंग
⟪नपुंसकम्
बहुवचन
पुल्लिंग
⟪पुंस्
बहुवचन
नपुंसकलिंग
⟪नपुंसकम्
१. सम्प्रदान
⟪१⟫. ⟪प्रथमा
⟪महान्⟪महत्⟪महान्तस्⟪महान्ति
२. accusative
⟪२⟫. ⟪द्वितीया
⟪महान्तम्⟪महत्⟪महतस्⟪महान्ति
३. करण
⟪३⟫. ⟪तृतीया
⟪महता
४. संप्रदान
⟪४⟫. ⟪चतुर्थी
⟪महते
५. अपादान
⟪५⟫. ⟪पञ्चमी
⟪महतस्
६. सम्प्रदान
⟪६⟫. ⟪षष्ठी
⟪महतस्
७. संप्रदान
⟪७⟫. ⟪सप्तमी
⟪महति

27.7.11. -vant / -mant प्रत्यय वाले पुल्लिंग और नपुंसकलिङ्ग: ⟪गुणवन्त्

एकवचन
पुल्लिंग
⟪पुंस्
एकवचन
नपुंसकलिङ्ग
⟪नपुंसकम्
बहुवचन
पुल्लिंग
⟪पुंस्
बहुवचन
नपुंसकलिङ्ग
⟪नपुंसकम्
1. सम्प्रदान
⟪१⟫. ⟪प्रथमा
⟪गुणवान्⟪गुणवत्⟪गुणवन्तस्⟪गुणवन्ति
2. accusative
⟪२⟫. ⟪द्वितीया
⟪गुणवन्तम्⟪गुणवत्⟪गुणवतस्⟪गुणवन्ति
3. instrumental
⟪३⟫. ⟪तृतीया
⟪गुणवता
4. dative
⟪४⟫. ⟪चतुर्थी
⟪गुणवते
5. ablative
⟪५⟫. ⟪पञ्चमी
⟪गुणवतस्
6. genitive
⟪६⟫. ⟪षष्ठी
⟪गुणवतस्
7. locative
⟪७⟫. ⟪सप्तमी
⟪गुणवति

27.7.12. Demonstrativpronomina: ⟪तद् । एतद् । इदम्

एकवचन
Masculine
⟪पुंस्
एकवचन
Neuter
⟪नपुंसकम्
एकवचन
Feminine
⟪स्त्री
बहुवचन
Masculine
⟪पुंस्
बहुवचन
Neuter
⟪नपुंसकम्
बहुवचन
Feminine
⟪स्त्री
1. सम्प्रदान
⟪१⟫. ⟪प्रथमा
⟪सस्⟫ / ⟪स⟪तत्⟪सा⟪ते⟪तानि⟪तास्
2. accusative
⟪२⟫. ⟪द्वितीया
⟪तम्⟪तत्⟪ताम्⟪तान्⟪तानि⟪तास्
3. instrumental
⟪३⟫. ⟪तृतीया
⟪तेन⟪तया⟪तैस्
4. dative
⟪४⟫. ⟪चतुर्थी
⟪तस्मै⟪तस्यै⟪तेभ्यस्
5. ablative
⟪५⟫. ⟪पञ्चमी
⟪तस्मात्⟪तस्यास्⟪तेभ्यस्
6. genitive
⟪६⟫. ⟪षष्ठी
⟪तस्य⟪तस्यास्⟪तेषाम्
7. locative
⟪७⟫. ⟪सप्तमी
⟪तस्मिन्⟪तस्याम्⟪तेषु
एकवचन
⟪एकवचनम्
बहुवचन
⟪बहुवचनम्
पुल्लिंगनपुंसकलिङ्गस्त्रीलिङ्गपुल्लिंगनपुंसकलिङ्गस्त्रीलिङ्ग
1. सम्प्रदान
⟪१⟫. ⟪प्रथमा
⟪एषस्⟫ / ⟪एष⟪एतत्⟪एषा⟪एते⟪एतानि⟪एतास्
2. accusative
⟪२⟫. ⟪द्वितीया
⟪एतम्⟫ / ⟪एनम्⟪एतत्⟫ / ⟪एनत्⟪एताम्⟫ / ⟪एनाम्⟪एतान्⟫ / ⟪एनान्⟪एतानि⟪एतास्⟫ / ⟪एनाः
3. instrumental
⟪३⟫. ⟪तृतीया
⟪एतेन⟫ / ⟪एनेन⟪एतया⟫ / ⟪एनया⟪एतैस्
4. Dativ
⟪४⟫. ⟪चतुर्थी
⟪एतस्मै⟪एतस्यै⟪एतेभ्यस्
5. Ablativ
⟪५⟫. ⟪पञ्चमी
⟪एतस्मात्⟪एतस्यास्⟪एतेभ्यस्
6. Genetiv
⟪६⟫. ⟪षष्ठी
⟪एतस्य⟪एतस्यास्⟪एतेषाम्
7. Lokativ
⟪७⟫. ⟪सप्तमी
⟪एतस्मिन्⟪एतस्याम्⟪एतेषु
एकवचन
⟪एकवचनम्
बहुवचन
⟪बहुवचनम्
पुल्लिंगनपुंसकलिङ्गस्त्रीलिङ्गपुल्लिंगनपुंसकलिङ्गस्त्रीलिङ्ग
1. सम्प्रदान
⟪१⟫. ⟪प्रथमा
⟪अयम्⟪इदम्⟪इयम्⟪इमे⟪इमानि⟪इमास्
2. accusative
⟪२⟫. ⟪द्वितीया
⟪इमम्⟫ / ⟪एनम्⟪इदम्⟫ / ⟪एनत्⟪इमाम्⟫ / ⟪एनाम्⟪इमान्⟫ / ⟪एनान्⟪इमानि⟫ / ⟪एनानि⟪इमास्⟫ / ⟪एनाः
3. instrumental
⟪३⟫. ⟪तृतीया
⟪अनेन⟫ / ⟪एनेन⟪अनया⟫ / ⟪एनया⟪एभिस्
4. Dativ
⟪४⟫. ⟪चतुर्थी
⟪अस्मै⟪अस्यै⟪एभ्यस्
5. Ablativ
⟪५⟫. ⟪पञ्चमी
⟪अस्मात्⟪अस्यास्⟪एभ्यस्
6. Genetiv
⟪६⟫. ⟪षष्ठी
⟪अस्य⟪अस्यास्⟪एषाम्
7. Lokativ
⟪७⟫. ⟪सप्तमी
⟪अस्मिन्⟪अस्याम्⟪एषु

27.7.13. संबंधवाचक सर्वनाम: ⟪यद्

एकवचन
पुल्लिंग
⟪पुंस्
एकवचन
नपुंसकलिंग
⟪नपुंसकम्
एकवचन
स्त्रीलिंग
⟪स्त्री
बहुवचन
पुल्लिंग
⟪पुंस्
बहुवचन
नपुंसकलिंग
⟪नपुंसकम्
बहुवचन
स्त्रीलिंग
⟪स्त्री
1. प्रथमा
⟪१⟫. ⟪प्रथमा
⟪यस्⟪यत्⟪या⟪ये⟪यानि⟪यास्
2. द्वितीया
⟪२⟫. ⟪द्वितीया
⟪यम्⟪यत्⟪याम्⟪यान्⟪यानि⟪यास्
3. तृतीया
⟪३⟫. ⟪तृतीया
⟪येन⟪यया⟪यैस्
4. चतुर्थी
⟪४⟫. ⟪चतुर्थी
⟪यस्मै⟪यस्यै⟪येभ्यस्
5. पञ्चमी
⟪५⟫. ⟪पञ्चमी
⟪यस्मात्⟪यस्यास्⟪येभ्यस्
6. षष्ठी
⟪६⟫. ⟪षष्ठी
⟪यस्य⟪यस्यास्⟪येषाम्
7. सप्तमी
⟪७⟫. ⟪सप्तमी
⟪यस्मिन्⟪यस्याम्⟪येषु

27.7.14. प्रश्नवाचक सर्वनाम: ⟪किम्

एकवचन
पुल्लिंग
⟪पुंस्
एकवचन
नपुंसकलिंग
⟪नपुंसकम्
एकवचन
स्त्रीलिंग
⟪स्त्री
बहुवचन
पुल्लिंग
⟪पुंस्
बहुवचन
नपुंसकलिंग
⟪नपुंसकम्
बहुवचन
स्त्रीलिंग
⟪स्त्री
1. प्रथमा
⟪१⟫. ⟪प्रथमा
⟪कस्⟪किम्⟪का⟪के⟪कानि⟪कास्
2. द्वितीया
⟪२⟫. ⟪द्वितीया
⟪कम्⟪किम्⟪काम्⟪कान्⟪कानि⟪कास्
3. तृतीया
⟪३⟫. ⟪तृतीया
⟪केन⟪कया⟪कैस्
4. चतुर्थी
⟪४⟫. ⟪चतुर्थी
⟪कस्मै⟪कस्यै⟪केभ्यस्
5. पञ्चमी
⟪५⟫. ⟪पञ्चमी
⟪कस्मात्⟪कस्यास्⟪केभ्यस्
6. षष्ठी
⟪६⟫. ⟪षष्ठी
⟪कस्य⟪कस्यास्⟪केषाम्
7. सप्तमी
⟪७⟫. ⟪सप्तमी
⟪कस्मिन्⟪कस्याम्⟪केषु


चित्र: ⟪कस्मात्⟫ ?
सुनामी 2005, श्रीलंका।
(चित्र स्रोत: विवरण)

Tüpfli's Global Village Library का हिस्सा