Esercizio 35
A) Formare le corrispondenti forme del perfetto per le seguenti forme verbali:
| Presente / Imperfetto | Perfetto |
|---|---|
| १. गायन्ति | जगुः |
| २. स्मरन्ति | सस्मरुः |
| ३. एष्यति | इयाय |
| ४. गच्छन्ति | जग्मुः |
| ५. कुरुते | चक्रे |
| ६. नेष्यन्ते | निन्यिरे |
| ७. जायते | जज्ञे |
| ८. जानाति | जज्ञौ |
| ९. संस्करोति | सञ्चस्कार |
| १०. पुनीते | पुपुवे |
| ११. बिभ्यति | बिभ्युः |
| १२. पिपुरति | पपरुः / पुपूरुः |
| १३. दत्ते | ददे |
| १४. यजन्ते | ईजिरे |
| १५. भजन्ति | भेजुः |
| १६. वक्ति | उवाच |
| १७. अदधुः | दधुः |
| १८. बिभ्रते | बभ्रिरे |
| १९. मरिष्यन्ति | मम्रुः |
| २०. अशक्नुवन् | शेकुः |
| २१. अवदन् | ऊदुः |
| २२. अपिबत् | पपौ |
| २३. अपान् | पपुः |
| २४. अलभत | लेभे |
| २५. अहन् | जघान |
| २६. मन्यन्ते | मेनिरे |
| २७. अक्रामन् | चक्रमुः |
| २८. अशृण्वन् | शुश्रुवुः |
| २९. मिमते | ममिरे |
| ३०. अपद्यत | पेदे |
| ३१. सुनोति | सुषाव |
| ३२. अतिष्ठत् | तस्थौ |
| ३३. पतिष्यन्ति | पेतुः |
| ३४. अपचत् | पपाच |
| ३५. अजहुः | जहुः |
| ३६. धक्ष्यन्ति | देहिरे |
| ३७. स्तौति | तुष्टाव |
| ३८. तनुते | तेने |
| ३९. अचरत् | चचार |
| ४०. जुह्वति | जुहुवुः |
| ४१. अहरत् | जहार |
B) Tradurre:
१. एकस्मिन्नेव काले क्षत्रियो महान्यष्टुमुपचक्रमे । तस्य यज्ञपशुमिन्द्रो जहार । प्रनष्टे तु पशौ दुर्ब्राह्मणः क्षत्रियमब्रवीत् । पशुर्हृतः क्षत्रियस्य दुर्नयादिति ॥१॥
Un tempo, un grande Kṣatriya iniziò a sacrificare. Indra rapì (prese) la sua vittima sacrificale. Ma quando l'animale scomparve, un malvagio Brahmano disse al Kṣatriya: "L'animale è scomparso a causa del cattivo comportamento del Kṣatriya."
२. रामो ऽपुत्र आस । स पुत्रमियेष न तु लेभे । तस्माद्देवानीजे ब्रह्मचर्यादिव्रतानि च चकार । देवा रामस्येष्टिं शुश्रुवू रामाय चेष्टपुत्रं ददुः ॥२॥
Rāma era senza figli. Desiderava un figlio, ma non ne ottenne. Pertanto, sacrificò agli dei e osservò voti come l'astinenza sessuale e simili. Gli dei udirono il desiderio di Rāma e gli concessero il figlio desiderato.
३. ब्राह्मण्यो यज्ञाय घृतं पेचुः । ब्राह्मणीषु पचन्तीषु ब्राह्मणा यज्ञस्थानं सञ्चस्करुः । ततः क्षत्रियाः शिवादिदेवानीजिरे ब्राह्मणाश्चेजुः ॥३॥
Le Brahmane lessero il ghee per il sacrificio. Mentre le Brahmane lessero, i Brahmani prepararono il luogo del sacrificio. Poi i Kṣatriya sacrificarono a Śiva e agli altri dei come padroni del sacrificio, e i Brahmani eseguirono il sacrificio (su incarico).
४. अर्हन्तः कुलबन्धनं बिभिदुर्लोभं च क्रोधं च मोहं च रुरुधुः सत्यं प्रजज्ञुर्दुःखान्मुक्ता मोक्षसुखमापुः ॥४॥
Gli Arhat hanno infranto i legami familiari, posto fine ad avidità, odio e confusione, riconosciuto la verità e — liberati dalla sofferenza — raggiunto la felicità della liberazione.
Variazione sintattica (Perfetto in Imperfetto)
C) Trasformare le frasi dell'esercizio B) sostituendo i perfetti con imperfetti:
१. एकस्मिन्नेव काले क्षत्रियो महान्यष्टुमुपाक्रामत । तस्य यज्ञपशुमिन्द्रो ऽहरत् ॥
२. रामो ऽपुत्र आसीत् । स पुत्रमैच्छन्न त्वलभत । तस्माद्देवानयजत ब्रह्मचर्यादिव्रतानि चाचरत् । देवा रामस्येष्टिमशृण्वन्रामाय चेष्टपुत्रमददुः ॥
३. ब्राह्मण्यो यज्ञाय घृतमपचन् । ब्राह्मणीषु पचन्तीषु ब्राह्मणा यज्ञस्थानं समस्कुर्वन् । ततः क्षत्रियाः शिवादिदेवानयजन्त ब्राह्मणाश्चायजन् ॥
४. अर्हन्तः कुलबन्धनमभिन्दंल्लोभं च क्रोधं च मोहं चारुन्धन्सत्यमजानन्दुःखान्मुक्ता मोक्षसुखमाप्नुवन् ॥

Fig.: ब्राह्मणीषु पचन्तीषु ...
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