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Utseende
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| परस्मैपदम् | आत्मनेपदम् | |||
|---|---|---|---|---|
| एकवचनम् | बहुवचनम् | एकवचनम् | बहुवचनम् | |
| Primary endings | -si | -tha | -se | -dhve |
| Secondary endings | -s | -ta | -thās | -dhvam |
| Perfect endings | -tha | -a | -se | -dhve |
Note that the secondary ending of the 2.pl.P. is identical to the secondary ending of the 3.sg.Ā.
2nd person:

The 3.sg.Ā Imperfect or Optative is formally identical to the 2.pl.P. Imperfect or Optative!
भू 1P
| परस्मैपदम् | आत्मनेपदम् | |||
|---|---|---|---|---|
| एकवचनम् | बहुवचनम् | एकवचनम् | बहुवचनम् | |
| Indicative Present लट् | भवसि bho + a + si | भवथ | भवसे | भवध्वे |
| Imperfect लङ् | अभवस् | अभवत | अभवथास् | अभवध्वम् |
| Optative विधिलिङ् | भवेस् | भवेत | भवेथास् | भवेध्वम् |
विश् 6P
| परस्मैपदम् | आत्मनेपदम् | |||
|---|---|---|---|---|
| एकवचनम् | बहुवचनम् | एकवचनम् | बहुवचनम् | |
| Indicative Present लट् | विशसि | विशथ | विशसे | विशध्वे |
| Imperfect लङ् | अविशस् | अविशत | अविशथास् | अविशध्वम् |
| Optative विधिलिङ् | विशेस् | विशेत | विशेथास् | विशेध्वम् |
नृत् 4P
| परस्मैपदम् | आत्मनेपदम् | |||
|---|---|---|---|---|
| एकवचनम् | बहुवचनम् | एकवचनम् | बहुवचनम् | |
| Indicative Present लट् | नृत्यसि | नृत्यथ | नृत्यसे | नृत्यध्वे |
| Imperfect लङ् | अनृत्यस् | अनृत्यत | अनृत्यथास् | अनृत्यध्वम् |
| Optative विधिलिङ् | नृत्येस् | नृत्येत | नृत्येथास् | नृत्येध्वम् |
चुर् 10U
| परस्मैपदम् | आत्मनेपदम् | |||
|---|---|---|---|---|
| एकवचनम् | बहुवचनम् | एकवचनम् | बहुवचनम् | |
| Indicative Present लट् | चोरयसि | चोरयथ | चोरयसे | चोरयध्वे |
| Imperfect लङ् | अचोरयस् | अचोरयत | अचोरयथास् | अचोरयध्वम् |
| Optative विधिलिङ् | चोरयेस् | चोरयेत | चोरयेथास् | चोरयेध्वम् |
ईक्ष् 1Ā
| एकवचनम् | बहुवचनम् | |
|---|---|---|
| Indicative Present लट् | ईक्ष्यसे īkṣ-ya-se | ईक्ष्यध्वे |
| Imperfect लङ् | ऐक्ष्यथास् | ऐक्ष्यध्वम् |
| Optative विधिलिङ् | ईक्ष्येथास् | ईक्ष्येध्वम् |
दा 3U
| परस्मैपदम् | आत्मनेपदम् | ||
|---|---|---|---|
| एकवचनम् | बहुवचनम् | एकवचनम् | बहुवचनम् |
| दास्यसि | दास्यथ | दास्यसे | दास्यध्वे |
भू 1P
| परस्मैपदम् | आत्मनेपदम् | ||
|---|---|---|---|
| एकवचनम् | बहुवचनम् | एकवचनम् | बहुवचनम् |
| भविष्यसि | भविष्यथ | भविष्यसे | भविष्यध्वे |
| एकवचनम् (त्वद्) | बहुवचनम् (युष्मद्) | |
|---|---|---|
| प्रथमा | त्वम् | यूयम् |
| द्वितीया | त्वाम् त्वा | युष्मान् वस् |
| तृतीया | त्वया | युष्माभिस् |
| चतुर्थी | तुभ्यम् ते | युष्मभ्यम् वस् |
| पञ्चमी | त्वत् | युष्मत् |
| षष्ठी | तव ते | युष्माकम् वस् |
| सप्तमी | त्वयि | युष्मासु |
The forms त्वा, ते, and वस् must not be used at the beginning of a sentence or a verse half-line. They also may not be used before च, वा, एव and some other particles:
त्वां मां च "you and me"
ज्ञा + आ Causative आज्ञापयति : to command, to order
आपण m.: market

Fig.: आपणः
(Image source: Details)
सत्वर 3: fast, hurried
पण्य 3: for sale; n.: goods, trade

Fig.: पण्यानि
(Image source: Details)
आम् : yes
सम m. = वर्ष n.
-आयुत 3: provided with
भद्र 3: good, happy; Vocative: my dear!
समय m. (from सम्-इ): agreement, contract, deadline, appointment, time
निश्चित 3: decided, fixed
नोचेत् : if not, otherwise
विलम्ब n.m.: delay, lateness
विपणि f.: shop

Fig.: विपणिः
(Image source: Details)
वणिज् m.: merchant

Fig.: वणिक्
(Image source: Details)
वर 3: best
शीघ्र 3: fast, swift
वत्स m.: calf, young animal, child; Voc.: my dear

Fig.: वत्सः
(Image source: Details)
उत्तम 3: highest, best
अल्प 3: small, low
मूल्य n.: value, price
कियत् 3: how big
शर्करा f.: sugar (the German "Zucker" goes via Italian zucchero, from there via Arabic sukkar - سكر and Persian šakkar - شکر back to the Sanskrit शर्करा!)
अधिक 3: additional, surplus, extraordinary
तर्हि : then, at that time; therefore, thus
तुल् 10 तुलयति । तोलयति : to weigh

Fig.: तोलन्ति
(Image source: Details)
कर्गल n.: paper
संपुट m.: box (here: package, bundle)
पुरतस् : in front, before
श्रेष्ठिन् m.: wealthy merchant
जव 3: fast, hurried
द्रु 1P द्रवति to run
Perf. IIIa दुद्राव, दुद्रुवुर्
Fut. द्रोष्यति
Pass. द्रूयते
Caus. द्रावयति
PPP द्रुत
Absol. -द्रुत्य
Inf. द्रोतुम्
रे Interjection: Hey! You there!
अन्यद् 3: another (declension like यद् )
वञ्चक m.: fraudster
पश्चात्ताप m.: remorse
इत्थम् Adv.: in this way, thus
दिन n.: day
जन्मन् n.: birth
आनन्द m.: bliss, joy
A) Form the corresponding 2nd person for the following verb forms in tense, number, mood etc.:
B) Översätt till sanskrit:
Varför sitter ni medan läraren står?
Tvivlar du på om en god gärning bär god frukt?
Kommer ni att visa fadern den innersta tempelskrinet?
Vilken diktares lovsång har du sjungit?
Kommer ni att sälja dessa frukter?
6. Was hast du befohlen?
7. Wann hast du dich in Benares aufgehalten (वृत्)?
9. In welcher Stadt wurdest du geboren?
| संवादः | Erklärungen |
|---|---|
| सुरेशः : अशोक1 क्व गच्छसीदानीम् ॥ | 1 Vokativ sg. |
| अशोकः : आपणे गच्छामि । सत्वरमेव कानिचित्पण्यानि क्रीत्वा निवर्तिष्ये ॥ | |
| सुरेशः : किं कश्चिदुत्सवो ऽद्य तव गृहे ॥ | |
| अशोकः : आम् । अद्य पितृपादानां2 जन्मदिनोत्सवः ॥ | 2 पाद pl. kann an Namen, Titel usw. angefügt werden, um Respekt auszudrücken |
| सुरेशः : किं वयस्तव3 पितृचरणानाम् ॥ | 3 Nom.Akk.sg zu वयस् n. "Alter" |
| अशोकः : पञ्चषष्टिसमायुतं4 मम पितुर्वयः । अद्य मम गृहे बहवः संबन्धिनो मित्राणि चागमिष्यन्ति । त्वयाप्यागन्तव्यम् ॥ | 4 पञ्चषष्टि fünfundsechzig |
| सुरेशः : भद्र5 कतिवादन5k आगमिष्यन्ति जनाः ॥ | 5 Vokativ sg. 5k वादन n. "-Uhr" |
| अशोकः : समयं किं पृच्छसि । षड्वादनं6 यावदागच्छ7 ॥ | 6 षड् "sechs" 7 2.sg.Imperativ |
| सुरेशः : सार्धषड्वादनं यावदागच्छामि चेत् ॥ | |
| अशोकः : नैव षड्वादन एव निश्चितरूपेणागन्तव्यं त्वया ॥ | |
| सुरेशः : अस्तु8 । तर्हि गच्छ त्वं । नोचेद्विलम्बो भविष्यति ॥ | 8 3.sg.Imperativ zu अस् 2P |
| अशोकः : (विपण्यां प्रविशति वणिजमुपसृत्य वदति च) अयि वणिग्वर9 कानिचित्पण्यानि क्रेतुमागतो ऽहम् । देहि10 शीघ्रं मह्यम् ॥ | 9 Vokativ sg. 10 2.sg.Imperativ P zu दा 3U |
| वणिक्11 : वत्स त्वं किंकिं क्रेतुमिच्छसि । मम विपणौ बहून्युत्तमोत्तमानि पण्यानि सन्ति तानि च स्वल्पमूल्यानि । वद12 कियत्परिमाणं किं क्रेतुमिच्छसि ॥ | 11 Nom.sg. zu वणिज् m. 12 2.sg.Imperativ |
| अशोकः : सेरभारा13 शर्करा कियता मूल्येन विक्रीयते ॥ | 13 सेर = Seer (= 0.93310 kg) |
| वणिक् : नाधिक्यं मूल्यम् । केवलमष्टाणकेन14 दास्यामि सेरभारां शर्कराम् ॥ | 14 आणक = Anna = 1/16 Rupee |
| अशोकः : तर्हि तोलयित्वा शीघ्रं सेरपरिमितां शर्करां देहि15 ॥ | 15 2.sg.Imperativ P zu दा 3U |
| वणिक् : (शर्करां कर्गले संपुटीकृत्य) बाल16 गृहाण17 शर्कराम् । देहि च मह्यमाणकाष्टकम्18 । सत्वरं देहि ॥ | 16 Vokativ sg. 17 2.sg.Imperativ 18 अष्ट "acht" |
| अशोकः : (आदाय हस्ते तस्य भारं चाल्पं विलोक्य) भो वणिक् । नैषा सेरभारा शर्करा दृश्यते । पुनः सम्यक्तोलयित्वा19 देहि ॥ | 19 सम्यक् Adv. "richtig" |
| वणिक् : (सहासम्) किमनेन । अकिञ्चिद्करमेतत् । तव भारवहनक्लेशो ऽल्पो भविष्यति ॥ | |
| अशोकः : (मनसि20 किंचिद्विचार्याणकचतुष्टयं21 च तस्य पुरत उपस्थाप्य) भो श्रेष्ठिन् गृहाण22 मूल्यम् । मया हि शीघ्रं गृहं गन्तव्यम् ॥ (इत्युक्त्वा ततः प्रस्थितः) | 20 Lok.sg. zu मनस् n. "Geist" 21 -चतुष्टय "Anzahl von vier" 22 Imperativ.sg. |
| वणिक् : रे बालक23 । एह्येहि24 शृणु25 तावत् । अल्पमेव मूल्यं दत्त्वा क्व व्रजसि । आणकचतुष्टयमन्यदपि देहि ॥ | 23 Vokativ sg. 24 2.g.Imperativ P zu इ+आ 25 2.sg.Imperativ P |
| अशोकः : श्रेष्ठिन्26 । किमनेन । अकिंचित्करमेतत् । नाणकगणनाक्लेशस्ते ऽल्पीयान्भविष्यति27 ॥ (इत्युक्त्वा ततो जवेन द्रवति) | 26 Vokativ sg. 27 Nom.sg.m. Komparativ zu अल्प = "ganz gering" |
| (विपणिस्थो वञ्चको वणिग्28 किमपि कर्तुमशक्नोत् केवलं तस्य मनसि29 पश्चात्ताप एवासीत्) | 28 वणिक् Nom.sg. zu वणिज् 29 Lok.sg. zu मनस् n. "Geist" |
| अशोको गृहमागत्य सर्वमपीतिवृत्तमकथयत् । तत्रस्था सर्वे ऽपि बान्धवा मित्राणि च परमानन्दं प्रापुः । इत्थं जन्मोत्सवः सानन्दं समाप्तिं यातः ॥ | |
| (Nach: Saral Sanskrit Shikshak III, S. 4f.) |